काही मनातलं ...
बचपन में सुना था की जिंदगी का सबक
ठोकर खाने के बाद मिलता है
कमबख्त हम तबसे ठोकरें ही खा रहे हैं
बचपन में सुना था की जिंदगी का सबक
ठोकर खाने के बाद मिलता है
कमबख्त हम तबसे ठोकरें ही खा रहे हैं
एक कविता माझी: माझिया मनात तिचीच सय भेटते परी बोलणे नाही भासे जरी ती अवखळ झरा वाहणे तिचे उथळ नाही नयनी जरी दिसती भाव खट्याळ हृदयात कारुण्य ...
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