काही मनातलं ...
लोग हमें गलत समझते हैं इसका गम नहीं है
बस अपनों की नजरों में छिपे सवाल कलेजा चिर जाते हैं
लोग हमें गलत समझते हैं इसका गम नहीं है
बस अपनों की नजरों में छिपे सवाल कलेजा चिर जाते हैं
एक कविता माझी: माझिया मनात तिचीच सय भेटते परी बोलणे नाही भासे जरी ती अवखळ झरा वाहणे तिचे उथळ नाही नयनी जरी दिसती भाव खट्याळ हृदयात कारुण्य ...
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